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मुख्यमंत्री कल मुकाम में 

नोखा।  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरूवार को मुकाम में होने वाले विश्नोई समाज के रजत जयंती समारोह को सम्बोघित करेंगे। अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के पदाघिकारी तीन दिन चलने वाले समारोह की तैयारियों में जुटे हैं। स्थानीय प्रशासन के अघिकारी भी मुकाम में डेरा लगाए हुए है।
मंगलवार को महासभा के अध्यक्ष मलखानसिंह विश्नोई ने बताया कि मुख्यमंत्री गुरूवार को दोपहर एक बजे हेलीकॉप्टर से मुकाम पहुंचेंगे। कृषि विपणन राज्य मंत्री गुरमीत कुन्नर व मध्यप्रदेश के योजना मंत्री अजयसिंह विश्नोई सहित अन्य विशिष्ट अतिथि भी गुरूवार को मुकाम पहुंच जाएंगे।  इस बीच आयोजन से जुड़े पदाघिकारियों की मंगलवार को दोपहर महासभा कार्यालय में हुई बैठक में तैयारियों पर चर्चा हुई। बैठक में राजाराम धारणिया, रामस्वरूप धारणिया, बीरबलराम विश्नोई, बिहारीलाल विश्नोई, फरसराम विश्नोई, अनिल विश्नोई, श्रवणराम जाणी, शिवराज विश्नोई, पूर्व प्रधान गंगाराम आदि ने मुख्यमंत्री के स्वागत कार्यक्रम पर चर्चा की।
तैयारियों का जायजा
मंगलवार को उपखंड अघिकारी अनिल कुमार कौशिक व पुलिस उप अधीक्षक धर्माराम मेघवाल ने मुकाम में बनाए जा रहे हेलीपेड व मंच का जायजा लिया। उपखंड अघिकारी ने हेलीपेड से सभा स्थल तक के मार्ग का जायजा लेते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मदन मेघवाल को मार्ग के दोनों तरफ बेरीकेटिंग करने के निर्देश दिए। मुकाम से समराथल तक सड़क को दुरस्त करने के निर्देश भी उपखंड अघिकारी ने सहायक अभियंता को दिए। मंच के पास आवश्यक बंदोबस्तों का जायजा भी अघिकारियों ने लिया। उप अधीक्षक ने मुख्यमंत्री के लिए बनाए गए सुरक्षा कक्ष का अवलोकन किया। अघिकारियों ने बाद में महासभा अध्यक्ष मलखानसिंह से कार्यक्रमों की जानकारी ली।
525 पौधे लगाए जाएंगे
रजत जयंती समारोह के दौरान मुकाम से पीपासर तक 525 पौधे लगाएं जाएंगे। महासभा के रामस्वरूप धारणिया ने बताया कि मंगलवार को मोखराम धारणिया, रामरतन डेलू, गिरधारी बेनीवाल, रामलाल उप सरपंच, रामस्वरूप पूनिया, जगमाल, शंकर जाखड़, बजरंग बेनीवाल, जगदीश, भंवर सारण आदि कार्यकर्ता गड्ढ़े खोदने के कार्य में लगे रहे। इसी प्रकार समाज के जन सहयोग से पौधों की सुरक्षा के लिए बनाए जाने वाले ट्री गार्ड कार्य में चम्पालाल, श्रवण खावा, रामकिसन डेलू, सतपाल खदाव, मस्ताना पूनिया, नारायण सिंह, ओम साध, रामनिवास सीगड़, सुखराम पूनिया, दुलाराम आदि सहयोग में जुटे रहे।
दीपमाला सजाने का आह्वान
विश्नोई महासभा के अध्यक्ष मलखान सिंह ने रजत जयंती समारोह के दौरान तीन दिन तक समाज के सभी लोगों को अपने घरों पर दीपमाला सजाने का आह्वान किया है।
रक्तदान शिविर की तैयारियां
समारोह के दौरान लगने वाले रक्तदान शिविर की तैयारियों में बिहारीलाल विश्नोई के नेतृत्व में जगदीश मांझू, ओंकार गोदारा, कैलास, महेन्द्र, रामकुमार दिलोईया, सुनील, सुभाष आदि युवा कार्यकर्ता जनसम्पर्क में जुटे रहे। बिहारीलाल ने बताया कि 525 युवा रक्तदान करेंगे।
रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया मंदिर
समारोह के लिए मुकाम स्थित गुरू जम्भेश्वर की समाघि स्थल के मंदिर को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। मंदिर के आस पास भी रोशनी की सजावट की गई है।
 
बिस्तर लेकर स्वास्थ्य भवन पहुंचे रोगी 
बीकानेर। पारीक चौक में घर-घर बुखार पीडितों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं होने के विरोध में क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार को यहां स्वास्थ्य भवन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष प्रदर्शन किया। वे वहीं पर बिस्तर बिछाकर लेट गए। इनमें कुछ  रोगी भी थे। बाद में कलक्टर के आदेश के बाद पारीक चौक में स्वास्थ्य शिविर लगाकर बुखार पीडितों के स्वास्थ्य की जांच की गई। क्षेत्र में पिछले एक माह से घर-घर में बुखार पीडित हैं लेकिन इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से माकूल व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र के लोगों में जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया था।
 इसे लेकर कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक राजकुमार किराडू तथा शहर जिला कांग्रेस के संगठन सचिव कैलाश पारीक के नेतृत्व में क्षेत्र के लोगों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के.के. गर्ग के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। क्षेत्र के लोगों ने कहा कि बार-बार कहने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
जबकि हर घर में बुखार पीडितों की संख्या में इजाफा हो रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान सहायक पुलिस अधीक्षक हेमेन्द्र कुमार तथा कोटगेट थानाप्रभारी राजेन्द्र सिंह पुलिस जाब्ते के साथ भी स्वास्थ्य भवन पहुंच गए। सेवादल के नेता किराडू ने जिला कलक्टर से भी वार्ता की। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गर्ग ने पारीक चौक में शिविर लगाने के आदेश जारी करते हुए डॉ. राहुल हर्ष, डॉ, रोहिताश कुलरिया, डॉ. अबरार पंवार तथा डॉ. पी.डी. तंवर ने बुखार पीडितों की जांच कर दवाइयां दी। पार्षद सुनील व्यास ने बताया कि शिविर में करीब साढ़े तीन सौ मरीजों की जांच की गई जिसमें से अधिकांश बुखार तथा बदन में तेज दर्द होने की शिकायत वाले मरीज थे।

693 काश्तकारों के खिलाफ मामले दर्ज 
श्रीकोलायत।  सरकारी जमीन पर अवैध काश्त के मामले बढ़े हैं। श्रीकोलायत उपनिवेशन तहसील नम्बर 2 व 3 में अब तक सरकारी जमीन पर अवैध काश्त करने के आरोप में 693 काश्तकारों के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं।
सरकार की हजारों बीघा जमीन पर अवैध काश्त जम कर हुई है। गिरदावरी होने के बाद इन दोनों तहसीलों में रिपोर्ट होने का काम लगभग पूर्ण हो चुका है। तहसीलदार श्याम लाल वर्मा ने बताया कि पटवारियों की रिपोर्ट के आधार पर उपनिवेशन तहसील नम्बर 2 में 343  तथा तहसील नम्बर 3 में 350 काश्तकारों के खिलाफ राजस्थान उपनिवेशन अघिनियम के अन्तर्गत मामले दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि मामलों का निस्तारण किया जा रहा है। फसल कुर्क करने के साथ नीलामी का काम चल रहा है। इसको लेकर गिरदावर व पटवारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसी प्रकार श्रीकोलायत उपनिवेशन तहसील नम्बर 1 के परिक्षेत्र में 788 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से फसल काश्त करने के आरोप में 67 काश्तकारों के खिलाफ मामले पूर्व में ही दर्ज हो चुके है।
 
 

तकनीक हमें जोड़ नहीं तोड़ रही है

पिछले दिनों तबीयत कुछ खराब थी तो डॉक्टर के यहां बैठा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। सोचा, जब तक बारी आती है तब तक चलो अपने दोस्त से बात कर ली जाए। उठकर बाहर आ गया और मोबाइल से अपने दोस्त को फोन लगा लिया। थोड़ी देर बाद जब लौटा तो पुराने दिन याद आ गए। एक वो भी जमाना था, जब डॉक्टर या वैद्य के पास बैठ अपनी बारी का इंतजार करते हुए लोग एक दूसरे से बातें कर लेते थे और एक नया रिश्ता बन जाता था। मगर आज तकनीक हमें वापस उन्हीं रिश्तों में धकेल देती है, जो हमारे कम्फर्ट जोन में है, नए रिश्ते बनाने का मौका ही नहीं देती।

कहने का मतलब है कि टेक्नॉलजी लोगों को करीब नहीं ला रही, बल्कि दूर कर रही है। व्यक्ति अंतर्मुखी बनता जा रहा है। हो सकता है इसके विपक्ष में तर्क देने वाले लोग यही कहेंगे कि फेसबुक, ऑर्कुट और ट्विटर जैसी तमाम सोशल साइट्स लोगों को करीब ले आई हैं। मगर मेरी सोच अलग दिशा में है। परंपरागत तरीकों को छोड़ सिर्फ वर्चुअली करीब आने में कैसी सफलता है?

यहां एक चीज की चर्चा करना जरूरी समझता हूं। तकनीक  ने एक नई चीज ईजाद की है 'सेकंड लाइफ'। कंप्यूटर पर एक कम्यूनिटी के रूप में सेकंड लाइफ का फलसफा एक अजीबोगरीब फिनॉमिना है। यह एक दूसरी ही जिंदगी है, जहां आप अपने आप को डिजाइन कर एक कैरक्टर का रूप लेते हैं और उस दूसरी दुनिया के मेंबर बन जाते हैं। यह एक ऐसी दुनिया है, जहां वे तमाम चीजें उपलब्ध हैं जो वास्तविक दुनिया में होती हैं। जहां आप कुछ भी खरीद सकते हैं, ऑफिस खोल सकते हैं, रिश्ते बना सकते हैं, शादी कर सकते हैं, तलाक ले सकते हैं और यहां तक कि बच्चे भी गोद ले सकते हैं। दुनिया में कई लोग उस दुनिया का हिस्सा बने हैं। वहां जो जैसा नहीं है, वैसा बनने की ऐक्टिंग कर रहा है। मैं भी अनुभव लेने के लिए वहां पहुंचा। मैंने पाया कि दुनिया के अलग-अलग कोने में बैठे लोग वहां वर्चुअली एक दूसरे से जुड़े हैं। दरअसल यह एक तरह की मानसिक स्थिति है, जिसमें दिमाग तो जुड़ा है पर शरीर नहीं।

तकनीक की वजह से यही स्थिति हमारी होती जा रही है और हम ऐसे टर्म से गुजर रहे हैं, जहां हमारे शरीर की भूमिका कम होती जा रही है और दिमाग की ज्यादा, जबकि पहले अपने अस्तित्व को जीवित रखने के लिए शरीर को मेहनत करनी होती थी। मगर अब तकनीक ने हमारे चारों और ऐसी चीजें मुहैया करवा दी हैं कि जिसमें शरीर का रोल ही नहीं बचा है। अब शरीर और दिमाग की दूरी बढ़ गई है, जहां दिमाग अपने आपको आगे समझने लगा है। यह दूरी धीरे-धीरे और बढ़ेगी। मगर यह सही नहीं है। यही वजह है कि हम अस्वस्थ होते जा रहे हैं, क्योंकि आधे से ज्यादा वक्त तो हमारा दिमाग ही ले लेता है और शरीर के हिस्से कुछ नहीं आता। इस तरह अपने आप में रहने वाले व्यक्तियों का निर्माण हो रहा है। आज पैरंट्स शिकायत करते हैं कि टीनएजर्स अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकलते। वजह साफ है वे रीयल के बजाय वर्चुअल रिश्तों से जुड़ते जा रहे हैं क्योंकि वह अपनी सुविधा के अनुसार रिश्ते बना रहे हैं। वह जब चाहें किसी से चैट करें, जब चाहें न करें या जब चाहें स्क्रीन पर आएं या न आएं।

इसलिए मेरा मानना है कि आने वाली पीढ़ी के लिए शरीर और दिमाग के बीच तालमेल बिठा पाना और मुश्किल हो जाएगा। जिस तरह मनुष्य प्रकृति के नियमों को तोड़ रहा है, उससे तो यही लगता है कि आने वाले समय में एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। हम एक ऐसी सभ्यता की ओर बढ़ रहे हैं जहां स्पर्श या आलिंगन जैसी चीजें महत्वहीन हो जाएगी। आंख से टपकते आंसुओं के  कोई मायने नहीं होंगे। हम एक जीवन को बर्खास्त करके दूसरे जीवन को जी रहे हैं। हम एक अंतहीन जीवन की कल्पना कर रहे हैं, जिसमें कहीं न कहीं विस्फोट होगा ही। बेहतर है समय रहते योग, ध्यान और प्राकृतिक तरीकों से शरीर और दिमाग की दूरी कम कर ली जाए।

यूथ को बहुत प्यार है अपने कल्चर से

कॉमनवेल्थ गेम्स की ओपनिंग सेरिमनी को मिली तारीफ से मैं वाकई बहुत खुश हूं। यह आयोजन मेरे लिए जिंदगी भर की उपलब्धि बन गया है। इसकी वजह सिर्फ इसे मिली तारीफ नहीं है, बल्कि कुछ ऐसी बातों का सामने आना भी है, जिन पर शायद हम कभी गौर ही नहीं करते। गेम्स की तैयारियों को लेकर चारों ओर से हो रही आलोचनाओं के बाद यह ओपनिंग सेरेमनी हमारे लिए बहुत बड़ा चैलेंज बन गई थी। इसकी प्लानिंग करते वक्त हम सभी के दिमाग में यह खयाल था कि युवा भारत को दुनिया के सामने कैसे रिप्रजेंट किया जाए। यही वजह रही कि पिछले 10 महीनों से हम इसकी तैयारी में जुटे थे। इसके तहत देश के हर कोने में हमने वर्कशॉप की। इन वर्कशॉप्स में युवा क्रिएटिव राइटर, म्यूजिशियन, पेंटर और आर्किटेक्चर्स को भी यह जानने के लिए शामिल किया कि वे सेरिमनी में किस तरह की चीजें चाहते हैं। चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हमारे देश के युवा अपनी संस्कृति से बेहिसाब प्यार करते हैं। इन सबके विचारों ने हमें दिशा दी कि इस सेरिमनी में संस्कृति को ही प्रमुखता दी जानी चाहिए।

जब से दुनिया ग्लोबल विलेज की राह पर आई है, तब से यूरोप और बाहरी देश अलग-अलग संस्कृति को साथ लेकर न चल पाने के संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन हमारे देश में हजारों साल से अलग-अलग संस्कृतियां एक साथ मिलकर रहना जानती हैं। हमारे लोग यह मानते हैं कि सबको उनके मुताबिक जीने की आजादी देनी चाहिए। हम यह नहीं कहते कि बुर्का मत पहनो या तिलक मत लगाओ। सबकी सोच यही है कि आपकी पहचान हमेशा आपके साथ रहे और आपस में सब दिल से जुड़े रहें। यही बात हमें दुनिया में सबसे ऊंचा खड़ा करती है। सिर्फ भारत ही है, जिससे पूरी दुनिया 'वसुदैव कुटुम्बकम' की बात सीख सकती है।

जब बात संस्कृति की आती है तो हम युवा वर्ग को कम आंकते हैं। लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि ग्लोबल विलेज में जी रहा युवा अपनी संस्कृति को अब बीते वक्त की बात मानता है। मगर सेरिमनी के अनुभव ने हमारी यह धारणा हमेशा के लिए बदल दी है। इस कार्यक्रम का सबसे अच्छा रिस्पॉन्स युवाओं की तरफ से आया। अगर मैं यह कहूं कि उम्रदराज लोगों से कहीं ज्यादा युवाओं को हमारी संस्कृति से प्यार है तो यह गलत नहीं होगा। इसमें अचरज की बात यह है कि अधेड़ उम्र के लोग दूरदर्शन के जमाने में जिए हैं। वहां उन्होंने कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, ओड़िसी जैसे नृत्य, जनजातियों का कल्चर, परेड और झांकियां सभी कुछ देखा है। युवा वर्ग ने तो बॉलिवुड के अलावा कुछ देखा ही नहीं है, बावजूद इसके वह अपनी संस्कृति से कनेक्ट महसूस करता है। दरअसल, इसकी वजह यह है कि आज पूरी दुनिया आपस में जुड़ गई है। एक देश से दूसरे देश में जाना बड़ी बात नहीं रह गई है। ऐसे में हमारी पहचान का अहसास हमें और ज्यादा होता है। उसी पहचान को जब हमने सही तरीके से पूरी दुनिया के सामने पेश किया तो सबको खासकर युवा वर्ग को बहुत अच्छा लगा।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब मैं बाहर आ रहा था तो कुछ बच्चे मेरे पास आए और मेरे पैर छूने लगे। उनकी उम्र 20 साल से भी कम थी। उनकी आंखों की चमक बता रही थी कि उन्हें कार्यक्रम कितना पसंद आया है। हालांकि सिर्फ दो घंटे में पूरे देश की संस्कृति दिखा देना मुमकिन नहीं था, पर हमारी कोशिश रही कि ज्यादा-से-ज्यादा जड़ों से जुड़ी चीजों को दिखा सकें।

हालांकि इस सेरिमनी के बाद सिर्फ सकारात्मक चीजें ही नहीं, बल्कि कुछ नकारात्मक चीजें भी सामने आईं। दरअसल भारत के पास सब कुछ है, मगर इसकी प्लानिंग बहुत कमजोर है। हालांकि यहां के लोगों में यह काबिलियत है कि वे बड़े-से-बड़े काम को अंजाम दे सकते हैं लेकिन कमी सिर्फ टाइम मैनेजमेंट में रह जाती है। उम्मीद है कि बहुत जल्द हम अपनी इस कमजोरी पर जीत हासिल करेंगे।

बताओ कौन यह शोला मेरे आंगन में लाया है...

किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है,
कहीं मंदिर की परछाई, कहीं मस्जिद का साया है,
न तब पूछा था हमसे और न अब पूछने आए,
हमेशा फैसले करके हमें यूं ही सुनाया है...


किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है...

हमें फुर्सत कहां रोटी की गोलाई के चक्कर से,
न जाने किसका मंदिर है, न जाने किसकी मस्जिद है,
न जाने कौन उलझाता है सीधे-सच्चे धागों को,
न जाने किसकी साजिश है, न जाने किसकी यह जिद है
अजब सा सिलसिला है यह, जाने किसने चलाया है।


किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है...

वो कहते हैं, तुम्हारा है, जरा तुम एक नजर डालो,
वो कहते हैं, बढ़ो, मांगो, जरूरी है, न तुम टालो,
मगर अपनी जरूरत तो है बिल्कुल ही अलग इससे,
जरा ठहरो, जरा सोचो, हमें सांचों में मत ढालो,
बताओ कौन यह शोला मेरे आंगन में लाया है।


किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है...


अगर हिंदू में आंधी है, अगर तूफान मुसलमां है,
तो आओ आंधी-तूफां यार बनके कुछ नया कर लें,
तो आओ इक नजर डालें अहम से कुछ सवालों पर,
कई कोने अंधेरे हैं, मशालों को दिया कर लें,
अब असली दर्द बोलेंगे जो दिलों में छुपाया है।


किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है...
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पेपरवेट

प्रसून जोशी  Wednesday September 29, 2010

E-Bikaner - Online News In Hindi::Latest News

पंचायतों को मिले स्कूल-अस्पताल
जयपुर। पांच विभाग प्रारम्भिक शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, कृषि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और महिला एवं बाल विकास विभाग के ग्रामीण क्षेत्र के अधिकार पंचायतों को सौंप दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक के अस्पताल अब पंचायतों के अधीन होंगे। इन पांच विभागों की जिला स्तर तक की ग्रामीण क्षेत्र की गतिविधियां, बजट व स्टाफ पंचायती राज संस्थाओं को हस्तान्तरित कर दिए गए हैं। जिला स्तर तक के तबादलों व पदस्थापन का अधिकार भी इन्हीं को दे दिया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी जयंती पर गांवों की सरकार को ये सौगातें सौंपने का ऎलान किया। गहलोत ने कार्यालय में बुलाए संवाददाता सम्मेलन में सम्बन्धित महकमों के मंत्रियों के बीच पंचायतों को अधिकार सौंपने की घोषणा की |

दीवार ढही, सचिन की फिफ्टी  
मोहाली। टीम इंडिया की दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ के आउट होने के बाद मास्टर ब्लास्टर ने पारी संभाल ली है। खबर लिखे जाने तक सचिन 99 गेंदों पर अपनी फिफ्टी बनाकर क्रीज पर डटे हैं। सुरेश रैना आठ के स्कोर पर खेल रहे हैं। इससे पहले, द्रविड़ को बोलिंगर ने 77 रन के निजी स्कोर पर पैवेलियन का रास्ता दिखाया।

दूसरे दिन के स्कोर दो विकेट पर 110 रन से आगे खेलते हुए दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने ईशांत शर्मा के साथ मिलकर पारी को बड़े ही खूबसूरत अंदाज में आगे बढ़ाया। इस दौरान नाइटवाचमैन की भूमिका में मैदान पर उतरे ईशांत ने उनका बखूबी साथ निभाया लेकिन यह साझेदारी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी। ईशांत डॉग बोलिंगर की एक गेंद को पढ़ने में चूक गए और क्लीन बोल्ड हो गए। ईशांत ने 18 रन बनाए।

गौरतलब है कि शनिवार को तेज गेंदबाज जहीर खान के 94 रन पर 5 विकेट लेने के बावजूद आस्ट्रेलिया भारत के खिलाफ पहले  क्रिकेट टेस्ट के दूसरे दिन 428 रन का सम्मानजनक स्कोर बनाने में सफल रहा। हालांकि, भारत ने भी ठोस शुरूआत करते हुए  पहली पारी में दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट खोकर 110 रन बनाए लिए थे। ओपनर गौतम गंभीर 25 रन बनाकर और  उनके जोड़ीदार वीरेन्द्र सहवाग 59 रन बनाकर आउट हुए। दोनों ओपनरों के विकेट बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन ने  लिए। स्टंप्स के समय राहुल द्रविड़ 21 रन बनाकर और नाइटवॉचमैन ईशांत शर्मा खाता खोले बिना क्रीज पर थे। इससे पहले पांच  विकेट पर 224 रन के स्कोर से आगे खेलते हुए आस्ट्रेलिया की पहली पारी 428 रन पर जाकर समाप्त हुई।

आस्ट्रेलियाई पारी के दौरान विकेटकीपर टिम पेन अपने करियर का पहला शतक बनाने से चूक गए लेकिन उनकी 92 रन की  सर्वश्रेष्ठ पारी की बदौलत आस्ट्रेलिया इस सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा। पेन को भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी  को शुक्रवार को जहीर खान की गेंद पर उस समय जीवनदान दिया था जब वह अपना खाता भी नहीं खोल पाए थे। लेकिन जहीर  ने अंतत: पेन को लक्ष्मण के हाथों कैच कराकर उन्हें शतक से वंचित कर दिया।

पेन ने 196 गेंदों की अपनी पारी में 12 चौके लगाए। वहीं शेन वाटसन 126 रन बनाकर हरभजन सिंह का शिकार बने। वाटसन  ने पेन के साथ छठे विकेट के लिए 53 रन जोड़े। आस्ट्रेलिया का छठा विकेट 275 के स्कोर पर गिरा लेकिन पेन और मिशेल जॉनसन (47) ने सातवें विकेट के लिए 82 रन की साझेदारी की। जहीर ने जॉनसन को धोनी के हाथों कैच कराकर इस साझेदारी को तोड़ा। जॉनसन ने अपनी पारी में पांच चौके और तीन छक्के लगाए। पेन आखिर नौवें विकेट के रूप में 427 के स्कोर पर आउट हुए और इसके एक रन बाद ही प्रज्ञान ओझा ने डग बोलिंगर को आउट कर आस्ट्रेलियाई पारी को समेट दिया। जहीर के अलावा हरभजन ने तीन और ओझा ने एक विकेट लिया। जवाब में गंभीर और सहवाग ने भारत को तेज और ठोस शुरूआत देते हुए पहले विकेट के लिए 13.2 ओवर में 81 रन जोड़ डाले।

फॉर्म के लिए जूझ रहे गंभीर ने 41 गेंदों पर 25 रन की अपनी पारी में दो चौके लगाए। वहीं दूसरे छोर पर सहवाग ने तेजतर्रार  बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 38 गेंदों में नौ चौकों की मदद से अपना अर्द्धशतक पूरा कर लिया। सहवाग को जॉनसन ने माइकल  क्लार्क के हाथों कैच कराकर आस्ट्रेलियाई खेमे को राहत दी।

आईओसी कांड में 177 करोड़ का बीमा समझौता 
जयपुर। शहर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में पिछले साल इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के डिपो में हुए भीषण अग्निकांड में कम्पनी ने आईसीआई लिम्बार्ड के साथ 177 करोड़ रूपए के बीमा दावे का समझौता किया है। सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में गत वर्ष अक्टूबर में आईओसी के एक टैंक की पाइप लाइन लीक होने से फैली आग में 12 लोगों की मौत हो गई थी तथा 150 से अधिक लोग घायल हो गए थे। भीषण अग्निकाण्ड में 50 हजार किलोलीटर डीजल जल कर नष्ट हो गया था।

आईओसी को करीब 250 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था। आग पर पूरी तरह से काबू पाने में एक सप्ताह से अधिक का समय लगा था। सीतापुरा आद्यौगिक क्षेत्र में लगभग दो-तीन किलोमीटर इलाके को आग और धुंए के गुब्बार ने अपने आगोश में ले लिया था। आग की लपटें 70 फुट तक उठी थी।
आईओसी के एक अधिकारी के अनुसार सम्पूर्ण सम्पत्ति एवं भण्डारण सुविधा क्षेत्र का 210 करोड़ रूपए का बीमा करवाया हुआ था। इस डिपो की ज्यादातर सम्पत्ति अग्निकांड में स्वाहा हो गई थी लेकिन बीमा कम्पनी के साथ 177 करोड़ रूपए की क्षतिपूर्ति राशि पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में आईओसी के महाप्रबंधक गौतम घोष सहित नौ अधिकारी आपराधिक लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे जो बाद में रिहा हो गए। इस भीषण अग्निकांड की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार समिति ने भी अपनी पहली रिपोर्ट में अधिकारियों को दोषी ठहराया था।

आज से आगाज 

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में शाम सात बजे राष्ट्रमण्डल खेलों का उद्घाटन समारोह शुरू होगा। 3 घण्टे तक चलने वाले इस समारोह में  भारत की 5 हजार वर्ष की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रखा जाएगा।
ये भी होंगे खास
- - 18 से 20 मिनट तक चलने वाले आरओआई में करीब 1000 ड्रमर एक साथ करेंगे मनोरंजन।
- एआर रहमान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रिय गीत, वैष्णव जन. को गाएंगे।
- जयपुर की गुलाबों भी समारोह में बिखेरेंगी अपनी आवाज का जादू।
- प्रतिभा पाटील, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, आईओसी  के अध्यक्ष जैक्स रोगे और प्रिंस चाल्र्स भी उपस्थित रहेंगे।
- खेलों की शुरूआत राष्ट्रपति पाटील करेंगी, जबकि पिं्रस चाल्र्स क्वींस बेटन में रखे गए महारानी के संदेश को पढेंगे। 
अभेद्य किले में तब्दील दिल्ली
राष्ट्रमण्डल खेलों में सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। आसमान में मानव रहित विमान और हेलीकॉप्टरों से लेकर अचूक निशानेबाज, बम निरोधक दस्ते और अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ एक लाख से अघिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इसे देश में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धा के दौरान अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा इंतजाम कहा जा रहा है।
ये भी मुस्तैद 
चारों तरफ 29,000 पुलिकर्मी तैनात ।
अर्द्धसैनिक बलों की 175 कम्पनियां। 3000 कमाण्डो।
तोड़फोड़ की कार्रवाई को रोकने के लिए 100 जवानों का दस्ता ।
विशेष रूप से प्रशिक्षित 200 खोजी कुत्ते और बम निष्क्रिय करने वाले 15 दस्ते।
बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
- स्टेडियमों और खेल गांव में 3000 सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रोनिक जांच मशीनें, कार स्कैनर, पास रीडर की व्यवस्था - किसी भी आपात स्थिति से निपटेंगे सेना व राष्ट्रीय आपदा राहत बल के जवान।
- वायुसेना के हेलीकॉप्टर और कमाण्डो स्टेडियमों और खेल गांव के ऊपर लगातार निगरानी करेंगे।
- मानव रहित विमान (यूएवी) भी अलर्ट हैं जो आसमानी हमले से मुकाबले के लिए तैयार हैं ।
70,000 करोड़ रूपए होंगे खर्च
7000 कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुति
60 हजार दर्शक समारोह में रहेंगे मौजूद
3 अरब लोग टेलीविजन पर देखेंगे उद्घाटन
खास से आम को परेशानी
14 आयोजन स्थलों के पास कॉमनवेल्थ लेन्स बनने से रोजाना लगता है जाम।
1600 ब्लू लाइन बसों का संचालन बन्द होने से लोगों को आवागमन में दिक्कत।
14 अक्टूबर तक स्कूल-कॉलेज बन्द होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाघित।

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खेल या जेल
भ्रष्टाचार की सच्ची कहानियों के साथ आज से शुरू हो रहे राष्ट्रमण्डल खेल दिल्ली को एक नई सौगात दे रहे हैं-बंद की। कहीं भी ऎसा कोई आयोजन होता है तो बाजारों से लेकर हाट तक सब खुले रहते हैं। लेकिन आज दिल्ली में सरकारी तौर पर सब कुछ बंद रखने की हिदायत दी गई है बाजारों तक को। स्कूल-कॉलेजों को तो पहले ही 14 अक्टूबर तक बंद कर दिया गया है। बसें भी बंद हैं और आम जनता के लिए बड़ी-बड़ी सड़कें भी। आखिर ये खेल हैं या जनता को घरों में बंद करने वाली जेल। ऎसे खेलों सेक्या फायदा।
 अफसोस इस बात का है कि कोई देखने वाला नहीं है। 'देश की इज्जत' के नाम पर सब चुप हैं। उस जनता की तकलीफों को कोई नहीं देख रहा जिनसे देश बनता है। सरकार भी नहीं और अदालत भी। गुलामी की याद दिलाने वाले इन छोटे से खेलों से देश की जनता इतनी त्रस्त हो जाएगी कि भविष्य में किसी बड़े खेल आयोजन की सुगबुगाहट शुरू होते ही शायद कह दे- नहीं चाहिए ऎसे खेल।

 कपड़ा व्यवसायी के घर डाका 

जयपुर। गोपालपुरा मोड़ के पास इंदिरा नगर स्थित एक कपड़ा व्यवसायी के मकान में शुक्रवार आधी रात को घुसे आठ सशस्त्र नकाबपोश डकैतों ने मुखिया समेत परिवार के आठ सदस्यों को बंधक बना उनकी पिटाई कर दी। दो घंटे तक आतंक मचाने वाले ये डकैत घर से 25 हजार नकद और करीब सात तोला सोने के जेवरात ले गए। पुलिस के अनुसार कपड़ा व्यापारी विमल अग्रवाल (60) यहां 7-इंदिरा नगर में परिवार सहित रहते हैं। शुक्रवार रात परिवार सहित खाना खाने के बाद सभी अपने-अपने कमरे में सो गए।
देर रात करीब ढाई बजे आठ सशस्त्र नकाबपोश उनके मकान के मुख्य द्वार की कुंदी तोड़कर अंदर घुसे। उन्होंने जैसे ही ड्राईग रूम की कुंदी तोड़ी तो आवाज सुनकर विमल व उनकी पत्नी विमला देवी जाग गए। उन्होंने दरवाजा खोला और सामने आठ नकाबपोशों को देख घबरा गए।
 इससे पहले की वे कुछ समझ पाते एक डकैत ने उनकी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी और उन्हे घसीटते हुए कमरे में ले गया। दोनों के हाथ-पैर बांधने के बाद चार डकैत बाहर निकले। जिसमें से दो डकैत दूसरे कमरे में सो रही उनकी विधवा पुत्रवधु अमिता और उसके बेटे दिपांशु (7) व बेटी विघि (8) को पकड़कर लाए और विमल के कमरे में पटक दिया।
 दो डकैत पहली मंजिल पर गए, जहां एक कमरे से उनके बेटे प्रमोद (28) पत्नी निघि और ढाई वर्षीया बेटी प्रथा को नीचे ले आए। डकैतों ने सभी को विमल के कमरे में लाकर उनके हाथ-पैर बांध दिए। अभियुक्तों ने घर में मौजूद मोबाइल फोनों की बैट्रियां निकाल कर फेंक दिए व बेसिक फोन को भी तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने विमल और बेटे प्रमोद से अन्य कमरों की अलमारी की चाबी मांगी। ना-नुकर करने पर डकैतों ने उनकी पिटाई कर दी। इस पर वे घबरा गए और डकैतों को चाबी थमा दी।
इसके बाद एक डकैत ने पूरे परिवार को रिवॉल्वर की नोंक पर रखा और सरिया, तलवार, कटार से लैस अन्य डकैत कमरों में घुस गए। करीब दो घंटे तक पूरे घर का एक-एक कोना खंगालने के बाद डकैत वहां से 25 हजार रूपए और करीब सात तोला सोने के जेवर लेकर फरार हो गए। जाने से पहले डकैत मकान के मुख्य द्वार की कुंदी लगा गए। उनके जाने के बाद प्रमोद व विमल ने खिड़की से पड़ोसियों को आवाज लगाई। जिन्होंने आकर दरवाजा खोला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के साथ मौके पर डॉग स्क्वॉयड, एफएसएल टीम और फिंगर प्रिंट विशेष्ाज्ञों ने साक्ष्य जुटाए।
यह था हुलिया
अग्रवाल परिवार के अनुसार आठों डकैत की उम्र 25-30 वष्ाü के करीब थी। सभी ने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था। इसके अलावा उन्होंने गंदे कपड़े पहन रखे थे।
जिन्दा जला देने की धमकी
पुलिस का कहना कि डकैतों ने पूरे परिवार को एक साथ खड़ा करने के बाद उन पर शराब छिड़क दी। इसके बाद धमकाते हुए कहा कि किसी ने चिल्लाने या होशियारी दिखाने की कोशिश की तो उनको जलाकर राख कर देंगे। इस घटना से पूरा परिवार बुरी तरह सहम गया।
लड्डू गोपालजी को ले गए
प्रमोद ने बताया कि उनके पूजा घर में लड्डू गोपालजी की एक सुंदर मूर्ति रखी थी। जब डकैतों की नजर उस पर पड़ी तो वे मूर्ति की सुंदरता की तारीफ करने लगे और उसे भी ले गए।

रैकी के बाद वारदात
अग्रवाल का मकान कॉलोनी में कोने का है व उसके पास केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान का उपकार्यालय है। मकान के सामने मुख्य रास्ता है। आशंका है कि अभियुक्तों ने पहले रैकी की थी।

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