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मेगा ट्रेड फेयर का आगाज
महानरेगा में अनियमितता की शिकायतों की जांच के लिए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक आए थे। फर्जी जॉब कार्ड व कैदियों के नाम से भुगतान की शिकायतें सही पाई गई। उन्हें सभी रिकार्ड व पहले की गई जांच रिपोर्ट भी दी गई हैं।
एस.के.अरोडा अधिशासी अभियन्ता जिला परिषद ,बीकानेर
संशोधित सूचियों का इंतजार
बीकानेर। शिक्षा विभाग में अधिकारियों और व्याख्याताओं के तबादलों के पहले दौर के बाद अब संशोधित सूचियों का इंतजार है। अगले सप्ताह संशोधित स्थानान्तरण आदेश जारी होने की उम्मीद है।
- 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बालक को प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक किसी आस-पास के विद्यालय में शिक्षा पाने का अधिकार होगा।
- राज्य सरकार प्रत्येक बालक को अनिवार्य प्रवेश और उपस्थिति के लिए बाध्य है।
- प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी प्रत्येक बालक को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा।
- अभिभावकों का कर्तव्य होगा कि वे अपने बालक या प्रतिपाल्य का स्कूल में प्रवेश कराए।
- तीन से छह वर्ष तक के बालकों के लिए राज्य सरकार को नि:शुल्क विद्यालय पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
पॉलीथिन प्रतिबंध का असर बेअसर
'कैंटीन वालों को पॉलीथिन पर प्रतिबंध के आदेश दे रखे हैं। उसके बाद भी अगर कोई पॉलीथिन की थैलियों में चाय-कॉफी दे रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।'
डॉ. विनोद बिहाणी, अधीक्षक पीबीएम अस्पताल
बीकानेर। उद्योग-धन्धों को बढावा देने के लिए मेगा ट्रेड फेयर जैसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीकानेर में एक ही छत के नीचे खरीदारी की परिकल्पना भी पत्रिका ने साकार की है। यह बात विधानसभा में मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल ने शनिवार को राजस्थान पत्रिका व सोल स्पेस वंृदावन एन्क्लेव फेज-द्वितीय के संयुक्त प्रयास से सादुल क्लब मैदान पर शुरू हुए मेगा ट्रेड फेयर में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
इस अवसर पर बीकाजी ग्र्रुप के निदेशक शिवरतन अग्र्रवाल ने कहा कि देशभर के व्यापारियों के यहां आकर स्टालें लगाने से बाजार की विविधता दिखाई देती है। सोल स्पेस के एडमिनिस्ट्रेटिव हैड शंभूसिंह राठौड ने कहा कि मेले में लोगों का बढता जुडाव सफलता का द्योतक है।
इससे पहले बेनीवाल, अग्र्रवाल व राठौड ने फीता काटकर ट्रेड फेयर का शुभारम्भ किया। गणेश पूजन में भाग लिया। अतिथियों का राजस्थान पत्रिका बीकानेर के शाखा प्रभारी प्रदीप शेखावत और संपादकीय प्रभारी जिनेश जैन ने माल्यार्पण व साफा पहनाकर स्वागत किया। बाद में उन्होंने मेला परिसर में लगी स्टालों का निरीक्षण कर जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के सचिव कन्हैयालाल बोथरा, पर्यटनलेखक संघ के यू. सी. कोचर और सोल स्पेस के अरविन्द शर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
खाली जमीन दिखे पौधे लगाओ
बीकानेर। अब संभाग में पेट्रोल पम्पों, ढाबों एवं औद्योगिक क्षेत्र के आस-पास खाली पडी भूमि पर पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने हरित राजस्थान कार्यक्रम के तहत योजना तैयार की है। मुख्य वन संरक्षक डी.पी. शर्मा ने संभाग के उपवन संरक्षक, जिला उद्योग प्रबन्धक व सम्बन्धित विभागों को पत्र भेजकर निर्देश दिए है। संभाग में इस वर्ष वन विभाग को हरित राजस्थान व अन्य योजनाओं में करीब 59 लाख पौधे लगाने है।
चूरू अव्वल, बीकानेर व श्रीगंगानगर फिसडडी
वन विभाग को संभाग में हरित राजस्थान कार्यक्रम के तहत 15 सितम्बर तक करीब बीस लाख पौधे लगाने है। अभी पांच लाख पौधे ही लग पाए हैं।
अभी तक चूरू जिला अव्वल रहा है। वहां 400 हेक्टेयर में 2 लाख 5 हजार पौधे लगाने थे। विभाग ने 422 हेक्टेयर में 2 लाख 8 हजार पौधे लगा चुका है। श्रीगंगानगर फिसaी रहा है। यहां 1347 हेक्टेयर में 8 लाख 25 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य था पर अभी तक 213 हेक्टेयर में 1 लाख 11 हजार 8 सौ पौधे ही लगाए गए हैं। इसी तरह बीकानेर में पांच सौ हेक्टेयर में 7 लाख 50 हजार पौधे लगाने थे ,लेकिन 140 हेक्टेयर में 71 हजार पौधे ही लग सके है। हनुमानगढ जिले में 975 हेक्टेयर में 3 लाख 63 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य था । अभी 361 हेक्टेयर में 1 लाख 85 हजार पौधे लग चुके हैं।
हरित राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंग केनाल व भाखडा नहर के किनारे पौधारोपण करना भी शामिल था।
वन विभाग को संभाग में हरित राजस्थान कार्यक्रम के तहत 15 सितम्बर तक करीब बीस लाख पौधे लगाने है। अभी पांच लाख पौधे ही लग पाए हैं।
अभी तक चूरू जिला अव्वल रहा है। वहां 400 हेक्टेयर में 2 लाख 5 हजार पौधे लगाने थे। विभाग ने 422 हेक्टेयर में 2 लाख 8 हजार पौधे लगा चुका है। श्रीगंगानगर फिसaी रहा है। यहां 1347 हेक्टेयर में 8 लाख 25 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य था पर अभी तक 213 हेक्टेयर में 1 लाख 11 हजार 8 सौ पौधे ही लगाए गए हैं। इसी तरह बीकानेर में पांच सौ हेक्टेयर में 7 लाख 50 हजार पौधे लगाने थे ,लेकिन 140 हेक्टेयर में 71 हजार पौधे ही लग सके है। हनुमानगढ जिले में 975 हेक्टेयर में 3 लाख 63 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य था । अभी 361 हेक्टेयर में 1 लाख 85 हजार पौधे लग चुके हैं।
हरित राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंग केनाल व भाखडा नहर के किनारे पौधारोपण करना भी शामिल था।
बंदियों के नाम पर उठाया भुगतान
बीकानेर। महानरेगा में किस कदर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसका खुलासा नोखा उपखण्ड की हिमटसर ग्र्राम पंचायत के रिकार्ड की जांच के दौरान हुआ। यहां जेल में बंद हिस्ट्रीशीटरों के नाम से जॉब कार्ड बना कर भुगतान उठा लिया गया है। हिमटसर में बडे पैमाने पर अनियमितता की शिकायतें केन्द्र सरकार के ग्र्रामीण विकास मंत्रालय तक पहंुची थी। वहां से आए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक ने बी.के. पंडिता ने जांच शुरू की तो कई गडबडियां पकड में आई। उन्होंने पिछले तीन दिन में इस प्रकरण की पहले की जांच रिपोर्ट, रिकार्ड और अधिकारियों के बयान लिए। इसमें जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के स्तर पर की गई जांच की रिपोर्ट भी शामिल है।
पंडिता ने ग्र्राम पंचायत मुख्यालय जाकर जांच की तो बारह सौ फर्जी जॉब कार्ड बनाने,चार हिस्ट्रीशीटरों के जेल में रहते हुए महानरेगा में मजदूरी भुगतान आदि की शिकायतें सही पाई गई। शनिवार को जांच अधिकारी जरूरी रिकार्ड साथ ले कर दिल्ली रवाना हो गए।
शिकायतें सही पाई गई महानरेगा में अनियमितता की शिकायतों की जांच के लिए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक आए थे। फर्जी जॉब कार्ड व कैदियों के नाम से भुगतान की शिकायतें सही पाई गई। उन्हें सभी रिकार्ड व पहले की गई जांच रिपोर्ट भी दी गई हैं।
एस.के.अरोडा अधिशासी अभियन्ता जिला परिषद ,बीकानेर
संशोधित सूचियों का इंतजार
बीकानेर। शिक्षा विभाग में अधिकारियों और व्याख्याताओं के तबादलों के पहले दौर के बाद अब संशोधित सूचियों का इंतजार है। अगले सप्ताह संशोधित स्थानान्तरण आदेश जारी होने की उम्मीद है।
तबादलों में संशोधन के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से जयपुर टीम गई थीं। इनमें से प्रधानाध्यापकों के लिए गई टीम शनिवार को बीकानेर लौट आई है। शिक्षा संकुल में कई दिन तक चले अभ्यास के बाद संशोधन के प्रस्ताव तैयार करके निदेशक को सौंप दिए गए हैं। अब संशोधित सूचियों के लिए फिर से चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद प्रस्तावों के आधार पर स्थानान्तरण आदेश जारी किए जाएंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब 150 प्रधानाध्यापकों के तबादला आदेश संशोधित होंगे। व्याख्याताओं के तबादले के लिए गई टीम अभी जयपुर में ही है। गौरतलब है कि 29 जुलाई को ही राज्य के 1301 व्याख्याताओं के तबादले किए गए थे।
फिर आई पडौस से अवैध शराब
बीकानेर। बाहरी राज्य से अवैध शराब की आवक थम नहीं पा रही। आबकारी पुलिस ने शुक्रवार अर्द्धरात्रि सरदारशहर से बीकानेर की तरफ आ रही एक जीप का पीछा कर उसे जब्त कर लिया। उसमें से चंडीगढ निर्मित शराब की 17 पेटियां मिली, लेकिन आरोपी भाग छूटे। शराब की कीमत लगभग पचास हजार रूपए बताई जा रही है।
आबकारी पुलिस के उपनिदेशक प्रवर्तन जीवराज सिंह ने बताया कि मुखबिर से सरदारशहर से बीकानेर की तरफ अवैध शराब से भरी एक जीप आने की सूचना मिली थी। इस पर लूणकरनसर के आबकारी थाना प्रभारी छोटूराम के नेतृत्व में गांव गारबदेसर के पास नाकेबंदी कर दी गई। रात करीब डेढ बजे एक संदिग्ध जीप निकली। उसकी जांच के लिए रोकने की कोशिश की तो वह रूकी नहीं। बाद में उसका पीछा लगभग तीन किलोमीटर तक किया गया। इस दरम्यान जीप सडक के किनारे टीले में धंस गई। पुलिस को पीछे आते देख उसमें सवार दो व्यक्ति जीप छोड कर भाग छूटे। पुलिस ने जीप में से शराब की 17 पेटियां बरामद कर ली। उनमें से 15 पेटी में 180 बोतलें तथा दो पेटियों में 96 पव्वे थे। उपनिदेशक सिंह ने बताया कि पुलिस जीप के मालिक का पता लगाने में जुट गई है।
किसे मिला अधिकार
बीकानेर। महज बारह वर्ष का सिकन्दर। सुबह से शाम तक 'साब' लोगों को चाय पिलाता है, कचौरी और गुटखा पेश करता है, प्लेट धोता है, टेबल साफ करता है। वह स्कूल तो नहीं जाता लेकिन शिक्षा के अधिकार को समूचे प्रदेश में लागू करने के लिए जिम्मेदार प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय परिसर में रोज हाजरी देता है। सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक शिक्षाधिकारियों के बीच घूमते रहने वाले सिकन्दर को शिक्षा के अधिकार कानून का अहसास नहीं है।
बीकानेर में न सिर्फ शिक्षा निदेशालय बल्कि जिला कलक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, संभागीय आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक कार्यालयों के आसपास छोटे बच्चे चाय पकडाते ,कप प्लेट साफ कर रहे हैं। इन बच्चों को यह आभास तक नहीं है कि उनके लिए कोई कानून बना है।
कानून लागू करने के लिए कार्य योजना बन रही है, केंद्र सरकार से पैसा लाने की जुगत हो रही है, सरकारी स्कूलों में सभी तरह के शुल्क माफ कर दिए गए हैं और सभी संस्था प्रधानों को इसके लिए प्रयास के औपचारिक निर्देश भी जारी हुए। इसके विपरीत धरातल पर कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा। नए सत्र का एक महीना बीतने के बाद भी होटलों और ढाबों पर बच्चे ही काम कर रहे हैं।
पढने से दिमाग खराब होता है
पढाई करना ठीक नहीं है। इससे तनाव होता है। दिमाग भी खराब हो सकता है। यह कहना है सिकन्दर का। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक के कमरे से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित निदेशालय की कैंटीन में चाय परोसने का काम करता है।
पढाई करना ठीक नहीं है। इससे तनाव होता है। दिमाग भी खराब हो सकता है। यह कहना है सिकन्दर का। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक के कमरे से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित निदेशालय की कैंटीन में चाय परोसने का काम करता है।
पढाईक्, नहीं तो
बस स्टैण्ड के पास चाट पकोडी की दुकान पर काम कर रहे महमूद को जब पूछा गया कि क्या तुम पढते हो, तो उसने तुरंत जवाब दिया पढाईक्, नहीं तो। उसने पढाई के बजाय कप प्लेट धोने के साथ ग्राहकों को आकर्षित करना सीख लिया।
बस स्टैण्ड के पास चाट पकोडी की दुकान पर काम कर रहे महमूद को जब पूछा गया कि क्या तुम पढते हो, तो उसने तुरंत जवाब दिया पढाईक्, नहीं तो। उसने पढाई के बजाय कप प्लेट धोने के साथ ग्राहकों को आकर्षित करना सीख लिया।
भीख मांगेंगे, तो कुछ खाएंगे
भीख क्यों मांगते हो, इस सवाल के जवाब में भुट्टों के चौराहे पर एक मिठाई की दुकान के सामने जमे बच्चों ने जवाब देने के बजाय हाथ फैलाते हुए दयनीय सूरत बना ली। जिंदगी की पाठशाला ही उन्हें पढा रही है।
भीख क्यों मांगते हो, इस सवाल के जवाब में भुट्टों के चौराहे पर एक मिठाई की दुकान के सामने जमे बच्चों ने जवाब देने के बजाय हाथ फैलाते हुए दयनीय सूरत बना ली। जिंदगी की पाठशाला ही उन्हें पढा रही है।
कहां हैं चाइल्ड ट्रेकिंगक्
इन बच्चों को देखने के बाद सवाल उठता है कि आखिर चाइल्ड टे्रकिंग कहां हैंक् चाइल्ड ट्रेकिंग से जुडे अधिकारी व शिक्षक महमूद और सिकन्दर को देख पाए और न ही किसी ने इनको शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास किया। स्वयंसेवी संस्थाओं की नजर भी इन सैकडों बच्चों पर नहीं पड रही। कानून लागू होने के बाद प्रवेशोत्सव के दो दौर हो चुके हैं, लेकिन राज्य में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए विद्यालय पूर्व नि:शुल्क शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।
क्या कहता है कानूनइन बच्चों को देखने के बाद सवाल उठता है कि आखिर चाइल्ड टे्रकिंग कहां हैंक् चाइल्ड ट्रेकिंग से जुडे अधिकारी व शिक्षक महमूद और सिकन्दर को देख पाए और न ही किसी ने इनको शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास किया। स्वयंसेवी संस्थाओं की नजर भी इन सैकडों बच्चों पर नहीं पड रही। कानून लागू होने के बाद प्रवेशोत्सव के दो दौर हो चुके हैं, लेकिन राज्य में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए विद्यालय पूर्व नि:शुल्क शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।
- 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बालक को प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक किसी आस-पास के विद्यालय में शिक्षा पाने का अधिकार होगा।
- राज्य सरकार प्रत्येक बालक को अनिवार्य प्रवेश और उपस्थिति के लिए बाध्य है।
- प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी प्रत्येक बालक को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा।
- अभिभावकों का कर्तव्य होगा कि वे अपने बालक या प्रतिपाल्य का स्कूल में प्रवेश कराए।
- तीन से छह वर्ष तक के बालकों के लिए राज्य सरकार को नि:शुल्क विद्यालय पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
पॉलीथिन प्रतिबंध का असर बेअसर
बीकानेर। राज्य सरकार ने एक अगस्त से पूरे प्रदेश में पॉलीथिन थैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। लेकिन पीबीएम अस्पताल परिसर स्थित कैंटीन में प्रतिबंध का असर शीघ्र ही बेअसर होने लगा है।
खुले आम ग्राहकों को चाय एवं कॉफी पॉलीथिन थैली में ही डाल कर दी जा रही है। जिस दिन पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया गया था। उस दिन तो इन कैंटीनों पर ग्राहकों को चाय-कॉफी के लिए बर्तन साथ लाने के लिए कहा गया था। यह व्यवस्था दो-तीन दिन तक तो ठीक ठाक चली लेकिन बाद में कैंटीन संचालकों ने ग्राहकों के वापस चले जाने के कारण चोरी छिपे पॉलीथिन की थैलियां देनी प्रारंभ कर दी हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने कैंटीन वालों को पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का नोटिस जारी किया था। लेकिन दुकानदारों ने नोटिस को भी दर किनार कर दिया है।
अस्पताल परिसर में विभिन्न जगहों पर पॉलीथिन नहीं लाने सम्बन्धी हिदायत के पोस्टर लगा रखे हैं तथा सुरक्षा प्रहरियों को भी पॉलीथिन ले जाने पर मरीज के रिश्तेदारों को रोकने के निर्देश दे रखे हैं।
जांच की जाएगी'कैंटीन वालों को पॉलीथिन पर प्रतिबंध के आदेश दे रखे हैं। उसके बाद भी अगर कोई पॉलीथिन की थैलियों में चाय-कॉफी दे रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।'
डॉ. विनोद बिहाणी, अधीक्षक पीबीएम अस्पताल
1:52 AM
Sushil



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