युवराज वाल्मीकि की रोशन हुई जिंदगी
फर्श पर फटी हुई चादरें पड़ी हुई हैं. सिर्फ एक बिस्तर है और एक बड़ा-सा ट्रॉली बैग उसके नीचे की सारी जगह घेरे हुए है. ईंटों की दीवार पर एक पुरानी घड़ी लटकी हुई है. रसोई गैस के सिलेंडर के ऊपर लकड़ी के एक खाने में एक छोटा आइना और परफ्यूम की चार इस्तेमाल की हुई शीशियां रखी हैं. इनमें से एक में नारियल का तेल है. न पंखा, न टीवी, न कोई अलमारी.
हॉकी के नए सितारे युवराज वाल्मीकि के घर में आपका स्वागत है. 11 सितंबर को ओर्डोस, चीन में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट के दौरान गोल में दागे गए उनके हल्के से फ्लिक ने भारत को ट्रॉफी दिलाई थी.
21 वर्ष के युवराज मुंबई के पॉश मरीन ड्राइव इलाके में एक 11 मंजिली वाणिज्यिक इमारत के परिसर में 160 वर्गफुट की एक झेपड़ी में रहते हैं, जिसे बनाने की इजाजत उनके माली दादा को 45 वर्ष पहले दी गई थी. इसे न बिजली के कनेक्शन की पात्रता है न पानी के. वाल्मीकि परिवार को अपने घर में बिजली 16 सितंबर को तब मिली थी, जब वृहन्मुंबई विद्युत प्रदाय और परिवहन के अधिकारी उनकी झेपड़ी में बिजली सप्लाई का फॉर्म लेकर दौड़े चले आए थे, इंस्टालेशन का जरूरी शुल्क माफ कर दिया गया था और 24 घंटे के भीतर बिजली का मीटर लगा दिया.
वाल्मीकि की गृहिणी मां मीना कहती हैं, ''हम अंधेरे के इस तरह आदी हो गए थे कि अब रोशनी से तालमेल बैठाने में थोड़ा समय लगेगा.'' यह परिवार आज भी घर से 200 मीटर दूर बने सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करता है.
नई शोहरत कई लोगों को वाल्मीकि के दरवाजे लेकर आ रही है. लेकिन वे किसी को अपने घर के भीतर बैठने के लिए नहीं कह सकते, क्योंकि घर में कोई कुर्सी नहीं है. हॉकी का यह सितारा अपने यहां आने-जाने वालों से झेपड़ी के बाहर एक कोने में ही मिलता-जुलता और बात करता है. वाल्मीकि को मिली सफलता की वजह से उनके परिवार की माली हालत बदल रही है. अब बुनियादी सुविधाओं के लिए वाल्मिकी मोहताज नहीं होंगे.
यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उन्हें खेलों की एक उपाधि देने की पेशकश की है. शिवसेना कार्यकर्ताओं ने वादा किया है कि उन्हें उपनगरीय रहेजा कॉलेज से, जहां वे कॉमर्स में अंतिम वर्ष के छात्र हैं, पास के चर्नी रोड पर हिंदुजा कॉलेज में स्थानांतरित करवा देंगे. शिवसेना ने उन्हें एक एलसीडी टीवी और एक रेफ्रिजरेटर देने की पेशकश की है.
महाराष्ट्र सरकार ने 10,00,000 लाख रु. के नकद इनाम के अलावा एक मकान देने की पेशकश की है. ड्राइवर सुनील के घर जन्मे वाल्मीकि ने स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई की है. उनके माता-पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उन्हें पास के अवर लेडी ऑफ डॉलर्स स्कूल में दाखिला दिलवाया, जहां छठी कक्षा में पढ़ते हुए इस खेल से उनका परिचय साथी छात्र बून डि'सूजा ने करवाया था.
वाल्मीकि कहते हैं, ''जब मैंने पहली बार स्टिक उठाई, तभी से मुझे इससे प्रेम हो गया था.'' 2003 में वाल्मिकी एक स्थानीय क्लब बॉम्बे रिपब्लिकन के साथ पेशेवर हॉकी खेलने लगे, और 2007 में भारतीय हॉकी के चर्चित खिलाड़ी धनराज पिल्लै की उन पर नजर पड़ी और उन्होंने एयर इंडिया के साथ उनका करार करवा दिया. 2010 में 110 संभावित खिलाड़ियों में से इस युवा खिलाड़ी को वरिष्ठ राष्ट्रीय टीम के लिए बनी संक्षिप्त सूची के लिए चुन लिया गया.
वाल्मीकि ने फिर पलट कर नहीं देखा. वे रोजाना तीन घंटे के अभ्यास के लिए सुबह 6 बजे निकलते हैं. अपने गुरु और आदर्श के लिए वे कहते हैं, ''धनराजजी मुझे जो करने के लिए कहते हैं, मैं वह करता हूं. अगर वे नहीं होते, तो मैंने यह दिन न देखा होता.'' वाल्मीकि का अगला लक्ष्य 2012 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाने का है. उसके पहले, मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में धन्यवाद देने की एक यात्रा उनके दिमाग में है.
हॉकी के नए सितारे युवराज वाल्मीकि के घर में आपका स्वागत है. 11 सितंबर को ओर्डोस, चीन में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट के दौरान गोल में दागे गए उनके हल्के से फ्लिक ने भारत को ट्रॉफी दिलाई थी.
21 वर्ष के युवराज मुंबई के पॉश मरीन ड्राइव इलाके में एक 11 मंजिली वाणिज्यिक इमारत के परिसर में 160 वर्गफुट की एक झेपड़ी में रहते हैं, जिसे बनाने की इजाजत उनके माली दादा को 45 वर्ष पहले दी गई थी. इसे न बिजली के कनेक्शन की पात्रता है न पानी के. वाल्मीकि परिवार को अपने घर में बिजली 16 सितंबर को तब मिली थी, जब वृहन्मुंबई विद्युत प्रदाय और परिवहन के अधिकारी उनकी झेपड़ी में बिजली सप्लाई का फॉर्म लेकर दौड़े चले आए थे, इंस्टालेशन का जरूरी शुल्क माफ कर दिया गया था और 24 घंटे के भीतर बिजली का मीटर लगा दिया.
वाल्मीकि की गृहिणी मां मीना कहती हैं, ''हम अंधेरे के इस तरह आदी हो गए थे कि अब रोशनी से तालमेल बैठाने में थोड़ा समय लगेगा.'' यह परिवार आज भी घर से 200 मीटर दूर बने सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करता है.
नई शोहरत कई लोगों को वाल्मीकि के दरवाजे लेकर आ रही है. लेकिन वे किसी को अपने घर के भीतर बैठने के लिए नहीं कह सकते, क्योंकि घर में कोई कुर्सी नहीं है. हॉकी का यह सितारा अपने यहां आने-जाने वालों से झेपड़ी के बाहर एक कोने में ही मिलता-जुलता और बात करता है. वाल्मीकि को मिली सफलता की वजह से उनके परिवार की माली हालत बदल रही है. अब बुनियादी सुविधाओं के लिए वाल्मिकी मोहताज नहीं होंगे.
यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उन्हें खेलों की एक उपाधि देने की पेशकश की है. शिवसेना कार्यकर्ताओं ने वादा किया है कि उन्हें उपनगरीय रहेजा कॉलेज से, जहां वे कॉमर्स में अंतिम वर्ष के छात्र हैं, पास के चर्नी रोड पर हिंदुजा कॉलेज में स्थानांतरित करवा देंगे. शिवसेना ने उन्हें एक एलसीडी टीवी और एक रेफ्रिजरेटर देने की पेशकश की है.
महाराष्ट्र सरकार ने 10,00,000 लाख रु. के नकद इनाम के अलावा एक मकान देने की पेशकश की है. ड्राइवर सुनील के घर जन्मे वाल्मीकि ने स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई की है. उनके माता-पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उन्हें पास के अवर लेडी ऑफ डॉलर्स स्कूल में दाखिला दिलवाया, जहां छठी कक्षा में पढ़ते हुए इस खेल से उनका परिचय साथी छात्र बून डि'सूजा ने करवाया था.
वाल्मीकि कहते हैं, ''जब मैंने पहली बार स्टिक उठाई, तभी से मुझे इससे प्रेम हो गया था.'' 2003 में वाल्मिकी एक स्थानीय क्लब बॉम्बे रिपब्लिकन के साथ पेशेवर हॉकी खेलने लगे, और 2007 में भारतीय हॉकी के चर्चित खिलाड़ी धनराज पिल्लै की उन पर नजर पड़ी और उन्होंने एयर इंडिया के साथ उनका करार करवा दिया. 2010 में 110 संभावित खिलाड़ियों में से इस युवा खिलाड़ी को वरिष्ठ राष्ट्रीय टीम के लिए बनी संक्षिप्त सूची के लिए चुन लिया गया.
वाल्मीकि ने फिर पलट कर नहीं देखा. वे रोजाना तीन घंटे के अभ्यास के लिए सुबह 6 बजे निकलते हैं. अपने गुरु और आदर्श के लिए वे कहते हैं, ''धनराजजी मुझे जो करने के लिए कहते हैं, मैं वह करता हूं. अगर वे नहीं होते, तो मैंने यह दिन न देखा होता.'' वाल्मीकि का अगला लक्ष्य 2012 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाने का है. उसके पहले, मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में धन्यवाद देने की एक यात्रा उनके दिमाग में है.
12:50 AM
Sushil


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